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बासमती चावल को GI टैग मिलने से किसानों हो रहा नुकसान
digvijay singh


रायसेन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह प्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को GI टैग (Geographical Indication) दिए जाने की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। पूर्व सीएम ने मंगलवार को रायसेन के उदयपुरा स्थित उदय पैलेस में गैर-दलीय पूसा बासमती धान उत्पादक किसानों से संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं सुझावों को सुना। साथ ही मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग देने की मांग दोहराई। दिग्विजय सिंह ने इस दौरान कहा कि मध्य प्रदेश में हर साल करीब 27 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा बासमती चावल का उत्पादन होता है। यहां का बासमती चावल अन्य राज्यों से बेहतर किस्म का है। लेकिन GI टैग न मिलने के कारण पंजाब और अन्य राज्यों के व्यापारी मध्य प्रदेश के बासमती चावल में अपने राज्यों का GI टैग लगाकर निर्यात करने का लाभ कमा रहे हैं। इससे मध्य प्रदेश के किसान अपने हक से वंचित हो रहे हैं और उन्हें खुद के उगाए चावल का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।सिंह ने केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि GI टैग के अभाव में प्रदेश के किसान अपने ही उगाए बासमती चावल का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मध्य प्रदेश के बासमती चावल को तत्काल GI टैग देने की मांग की। सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2013 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार से मुलाकात कर मध्य प्रदेश के बासमती चावल का GI टैग स्वीकृत करवाया था, लेकिन मोदी सरकार आने के बाद वर्ष 2016 में इसे निरस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि आज देश के केंद्रीय कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, इसके बावजूद प्रदेश को बासमती चावल के लिए GI टैग नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि मध्य प्रदेश को बासमती चावल का GI टैग मिल जाता है तो राज्य से करीब 40 फीसदी बासमती चावल का निर्यात किया जा सकता है। इससे प्रदेश के किसानों को अपनी उपज की बेहतर पहचान और उसका उचित लाभ मिल सकेगा। सिंह ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के पास 77 GI टैग हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर एक ही दिन में 21 GI टैग दिए गए। वहीं मध्य प्रदेश को उसके बासमती चावल के लिए GI टैग से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, लेकिन उन्होंने प्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों के हित में इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के बासमती चावल का बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र में उत्पादित होता है, जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री चुनाव जीतकर आते हैं। किसान संवाद के दौरान रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर, नरसिंहपुर, मंदसौर सहित विभिन्न जिलों से आए बासमती धान उत्पादक किसानों ने अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। किसानों ने पूसा बासमती धान की पहचान, उत्पादन, उचित मूल्य और निर्यात से जुड़े विषयों पर चर्चा की तथा मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग दिलाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।

MadhyaBharat 16 September 2026

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