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रायपुर का 137 साल पुराना गणेशोत्सव, गोलबाजार से जुड़ी है खास कहानी
Raipur

 

रायपुर के गोलबाजार स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में गणेशोत्सव की परंपरा करीब 137 साल पुरानी बताई जाती है। शुरुआत में महज 7-8 लोगों ने मिलकर गणेश उत्सव मनाना शुरू किया था, जो आज एक बड़े आयोजन का रूप ले चुका है। इस उत्सव की खास पहचान भव्य झांकियां भी हैं। वर्ष 1999 में इसी स्थान पर पहली बार अमरनाथ गुफा की झांकी तैयार की गई थी। इसके साथ पाताल भैरवी, हनुमान लीला और चारों धाम के दर्शन भी झांकी के जरिए कराए गए थे।

श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेश उत्सव समिति की ओर से हर साल आयोजन को भव्य बनाया जाता है। समिति से जुड़े केदारनाथ गुप्ता के अनुसार, शुरुआती दौर में जहां कुछ लोग ही आयोजन संभालते थे, वहीं अब करीब 70 सदस्य उत्सव की व्यवस्थाओं में जुड़े हैं। गणेशजी के लिए करीब सात साल पहले 750 ग्राम सोने का मुकुट भी तैयार कराया गया था। गणेश चतुर्थी के दिन इसी मुकुट से बप्पा का अभिषेक किया जाता है। यह मुकुट विसर्जन कुंड तक भी ले जाया जाता है और पूजा के बाद सुरक्षित वापस लाया जाता है। इस बार गणपति बप्पा के साथ तिरुपति बालाजी, माता पद्मावती और महालक्ष्मी के दर्शन आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

गणेशोत्सव को सार्वजनिक रूप देने का इतिहास स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ा है। 1893 में बाल गंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव को सार्वजनिक आयोजन का स्वरूप दिया था। उस दौर में यह लोगों को एकजुट करने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बना। इसी ऐतिहासिक परंपरा की झलक आज भी देश के अलग-अलग हिस्सों के गणेशोत्सव में देखने को मिलती है। वहीं, गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर बप्पा की स्थापना को लेकर महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला का कहना है कि भगवान गणेश की स्थापना के लिए किसी विशेष मुहूर्त की अनिवार्यता नहीं है और तिथि के दौरान सुबह से रात तक स्थापना की जा सकती है।

 

MadhyaBharat 15 September 2026

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