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भोपाल के मठ के एक पते से 40 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनाने की आशंका, STF कर रही जांच
STF


भोपाल। डबरा के बाद भोपाल में भी  STF को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाने की जानकारी मिली है।   बांग्लादेश से आए लोगों को भारतीय नागरिक बताने का आरोप भी है। जांच में सामने आया है कि गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अन्ना नगर स्थित एक बौद्ध मठ के एक ही पते से करीब 40 पासपोर्ट जारी हुए हैं। जिसके बाद एक बार फिर पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया और पुलिस वेरिफिकेशन पर सवाल खड़े हो रहे। एसटीएस एसपी राजेश भदौरिया ने बताया कि जानकारी के आधार पर जांच की जा रही। आपको बता दें  जांच के दौरान भोपाल और डबरा के अलग-अलग पतों से 70 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई है। 
जानकारी के मुताबिक इन लोगों की पहचान बनाने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।  STF अब इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है।  दस्तावेज किसने तैयार किए और इनके आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में पहचान कैसे दर्ज कराई गई जांच की जा रही। जांच में सामने आया है कि  इस नेटवर्क के तार असम, कोलकाता और पश्चिम बंगाल तक जुड़े हो सकते हैं। STF की एक 5 सदस्यीय टीम जांच के लिए असम रवाना हो चुकी है।  टीम वहां संदिग्ध लोगों, दस्तावेजों और पासपोर्ट से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल करेगी। कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट के जरिए कुछ लोगों ने थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान की यात्रा की। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इन यात्राओं के पीछे क्या उद्देश्य था और विदेशों में इन लोगों का किसी नेटवर्क से संपर्क था या नहीं। जांच में यह आशंका भी सामने आई है कि कुछ लोगों ने बौद्ध अनुयायी के तौर पर अपनी पहचान का इस्तेमाल कर विदेश यात्राएं कीं।  मध्य प्रदेश के डबरा, भोपाल, बैतूल और छिंदवाड़ा से फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने के मामले सामने आए हैं। अब जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि इन लोगों का नेटवर्क कहां तक फैला है। लोग कहां से आए और किसके माध्यम से यहां पहुंचे।  दो आरोपी इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। दो संदिग्धों को नागपुर और उल्हासनगर से हिरासत में लिए गया है। पूछताछ की जा रही है। STF अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उनके संपर्कों की जांच के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही बौद्ध मठ के पते से करीब 40 पासपोर्ट आखिर कैसे जारी हो गए? पासपोर्ट आवेदन के दौरान दिए गए पते का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और पुलिस वेरिफिकेशन में इन मामलों को कैसे मंजूरी मिली। प्रारंभिक जांच में नेटवर्क के 2021 से 2023 के बीच सक्रिय रहने की जानकारी सामने आई है।  STF अब इस अवधि के दौरान जारी हुए संदिग्ध पासपोर्ट, उनके आवेदन, दस्तावेज, पते और पुलिस वेरिफिकेशन रिकॉर्ड को खंगाल रही है।  पूरे मामले में एसटीएफ जांच कर रही।

MadhyaBharat 11 September 2026

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