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भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), भोपाल बेंच ने बुधवार को वन विहार नेशनल पार्क की बाउंड्री के 100 मीटर के अंदर कथित अवैध कंस्ट्रक्शन का संज्ञान लिया और अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया। यह निर्देश एक पिटीशन पर सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रेमपुरा गांव में प्रतिबंधित ज़ोन के अंदर कई मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग बनाई गई हैं, और कथित तौर पर उस इलाके में कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी जारी है। पिटीशन के अनुसार, वन विहार बाउंड्री के साथ 100 मीटर के हिस्से को इको-सेंसिटिव ज़ोन के रूप में नामित किया गया है, जिसका मकसद वन्यजीवों की रक्षा करना और इंसान-जानवर टकराव को कम करना है। पार्क की बाउंड्री को पहले रेवेन्यू और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की एक जॉइंट कमेटी ने तय किया था। पिटीशनर ने आरोप लगाया कि प्रेमपुरा 100-मीटर ज़ोन में आता है और दावा किया कि वन विहार मैनेजमेंट कथित उल्लंघन के खिलाफ असरदार कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। पिटीशन में पार्क के पर्यावरण और इकोसिस्टम पर कंस्ट्रक्शन के संभावित असर पर भी चिंता जताई गई। NGT ने निर्देश दिया कि पिटीशन और उसके ऑर्डर की कॉपी वन विहार नेशनल पार्क और ज़ू के डायरेक्टर और मध्य प्रदेश के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन को भेजी जाए। दोनों अधिकारियों को कानून के मुताबिक सही कार्रवाई करने और तीन महीने के अंदर NGT सेंट्रल ज़ोन बेंच के रजिस्ट्रार को एक्शन-टेकन रिपोर्ट देने के लिए निर्देश दिये हैं।
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