Since: 23-09-2009
करीब नौ वर्षों के अंतराल के बाद मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव होने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट के सख्त रुख और जबलपुर के छात्र अदनान अंसारी की जनहित याचिका के बाद प्रदेश सरकार ने सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने का आश्वासन दिया है। इस घोषणा के बाद प्रदेश में छात्र राजनीति एक बार फिर सक्रिय हो गई है। Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) ने इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली बताया है, जबकि National Students' Union of India (NSUI) और कांग्रेस ने इसे अपने लंबे संघर्ष और न्यायालय के हस्तक्षेप का परिणाम बताया है।
छात्र संगठनों का कहना है कि छात्रसंघ लोकतंत्र की पहली पाठशाला हैं और यहीं से कई बड़े नेताओं का राजनीतिक सफर शुरू हुआ। वर्तमान मुख्यमंत्री Mohan Yadav सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने छात्र राजनीति से ही अपनी पहचान बनाई। कांग्रेस नेताओं ने 2016-17 के आंदोलन का जिक्र करते हुए बताया कि छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर 'मुन्नाभाई MBBS' से प्रेरित 'गेट वेल सून' अभियान चलाया गया था, जिसमें तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री को लाखों संदेश भेजे गए थे। बाद में मंत्री आवास के घेराव के दौरान कई छात्र नेताओं की गिरफ्तारी भी हुई थी। छात्र संगठनों का मानना है कि चुनाव बहाल होने से छात्रों की समस्याओं को संस्थागत मंच मिलेगा और उनकी आवाज अधिक प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंच सकेगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.
Created By:
Medha Innovation & Development |