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केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में जारी 'चिता आंदोलन' के तहत 'चूल्हा बंदी' आंदोलन ने और भी उग्र रूप ले लिया है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें छतरपुर जिला अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है। बीपी कम होने और गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद अमित भटनागर ने ओरल भोजन (मुंह से खाना) लेने से साफ इनकार कर दिया है और डॉक्टरों द्वारा केवल आईवी ड्रिप से उनका इलाज किया जा रहा है। इस बीच आंदोलन को लेकर उपजे भारी प्रशासनिक तनाव के बीच छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल सोमवार से अचानक छुट्टी पर चले गए हैं, जबकि रविवार की कार्रवाई के बाद छुट्टी पर गए एसपी दो दिनों बाद बुधवार को ड्यूटी पर वापस लौटे हैं।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि लगभग 44,605 करोड़ रुपए की इस महात्वाकांक्षी परियोजना के लिए प्रशासन ने फर्जी ग्रामसभाएं आयोजित कर जबरन जन-सहमति दिखाई है। आंदोलन से जुड़ीं नेता दिव्या अहिरवार का दावा है कि अमित भटनागर परियोजना से जुड़े 400 करोड़ रुपए के बड़े भ्रष्टाचार के दस्तावेज सार्वजनिक करने वाले थे, इसीलिए पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल से जबरन हिरासत में लिया। दौधन बांध निर्माण से छतरपुर और पन्ना जिले के हजारों आदिवासियों व ग्रामीणों की जमीनें जलमग्न होने की आशंका है, जिसके चलते ग्रामीण अपने सही मुआवजे, उचित पुनर्वास और अधिकारों की लड़ाई को लेकर लगातार सड़कों पर डटे हुए हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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