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छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों में सालभर में 6,967 मौतें: हाईकोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को लगाई फटकार
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छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और बुनियादी व्यवस्थाओं की बदहाली पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश में पिछले एक साल में सड़क हादसों में 6,967 लोगों की जान जाने के आंकड़ों पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने गहरी नाराजगी जताई है। सड़कों पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी और पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए चीफ जस्टिस ने तीखी टिप्पणी की कि "क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना?" कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, NHAI और संबंधित कलेक्टर्स से 10 दिन के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट ने सड़क सुरक्षा समितियों की लापरवाही को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में 15,484 हादसों में 6,967 मौतों के अलावा 13,156 लोग घायल हुए, जबकि वर्ष 2026 में मई तक ही 3,170 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। सरगुजा और कांकेर जैसे जिलों में सालभर में 300 से अधिक मौतें होने के बावजूद कलेक्टरों की अध्यक्षता वाली सड़क सुरक्षा समिति की पूरे साल में महज एक बैठक आयोजित की गई। बारिश के मौसम में हाईवे पर रात के वक्त बैठे मवेशियों और रामभरोसे चल रही यातायात व्यवस्था को लेकर कोर्ट ने जिम्मेदार अफसरों और प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया है।

Priyanshi Chaturvedi 22 July 2026

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