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ग्वालियर से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित कुलैथ गांव, जिसे 'मिनी पुरी' के नाम से जाना जाता है, पिछले लगभग 180 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की अनूठी परंपराओं का केंद्र बना हुआ है। यहां रथयात्रा से पहले भगवान के एकांतवास (अनसर) की परंपरा निभाई जाती है। वहीं, भोग अर्पित करने के बाद मिट्टी का घड़ा अपने आप चार हिस्सों में टूट जाने की मान्यता आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का विषय है। इसी विशेष परंपरा के चलते हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, 'मिनी पुरी' की स्थापना की कहानी वर्ष 1807 से जुड़ी है। कहा जाता है कि नौ वर्षीय अनाथ बालक सांवलेदास अपने माता-पिता से मिलने की चाह में दंडवत यात्रा करते हुए पुरी के लिए निकल पड़ा था। उसकी अटूट श्रद्धा और भक्ति से प्रेरित होकर कुलैथ में भगवान जगन्नाथ की स्थापना हुई और तभी से यहां पुरी की परंपराओं के अनुरूप रथयात्रा और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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