काशी, मथुरा और संभल विवाद: मध्यस्थता से इनकार, अदालत के फैसले पर दोनों पक्षों की सहमति
काशी, मथुरा और संभल के मंदिर-मस्जिद विवादों में हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए मध्यस्थता के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। 'समाधान समारोह 2026' पहल के तहत कोर्ट ने दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का सुझाव दिया था, लेकिन दोनों ने स्पष्ट किया कि वे कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत के फैसले को ही स्वीकार करेंगे। सुप्रीम कोर्ट परिसर में 21 से 23 अगस्त तक आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत का उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों का आपसी सहमति से निपटारा करना है।
वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद बनाई गई थी और परिसर को मंदिर घोषित कर नियमित पूजा की अनुमति दी जाए। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद का धार्मिक स्वरूप बरकरार रखा जाए और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के तहत नए दावों को खारिज किया जाए। इस मामले से जुड़े पूजा अधिकार, ASI सर्वे, वजूखाना और धार्मिक स्थल अधिनियम संबंधी विभिन्न मामलों की सुनवाई फिलहाल वाराणसी जिला अदालत, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जारी है।