Since: 23-09-2009
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में बकरीद या किसी भी दिन गाय और बछड़ों के वध पर रोक लगाने संबंधी मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में सुधार की आवश्यकता है और तमिलनाडु सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया। राज्य सरकार ने दलील दी कि जब तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट, 1958 कुछ निर्धारित परिस्थितियों में गोवंश के वध की अनुमति देता है, तब हाईकोर्ट का पूर्ण प्रतिबंध संबंधी निर्देश कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 48 और तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट का हवाला देते हुए राज्य सरकार को गोवंश की कुर्बानी रोकने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि गाय भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखती है और यदि किसी पशु का वध किया भी जाए तो वह केवल कानून के तहत निर्धारित स्थानों और वैध अनुमति के साथ ही हो सकता है। वहीं, इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट भी यह स्पष्ट कर चुका है कि बकरीद पर गोवंश की कुर्बानी अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है तथा बिना आवश्यक फिटनेस प्रमाणपत्र के किसी भी पशु का वध नहीं किया जा सकता।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.
Created By:
Medha Innovation & Development |