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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्वालियर के कम्पू क्षेत्र स्थित महाडिक की गोठ में करीब 30 साल पुराने आंगन विवाद का निपटारा करते हुए विवादित जमीन को प्रतिवादी की निजी संपत्ति माना है। जस्टिस आशीष श्रोती की एकलपीठ ने कहा कि वसीयत के आधार पर किए गए निर्माण को अवैध नहीं माना जा सकता। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्माण से हवा और रोशनी बाधित होने का दावा पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं हो सका। इस फैसले के साथ सिविल कोर्ट और जिला अदालत के पूर्व आदेशों को भी बरकरार रखा गया।
यह मामला 1997 में दायर दीवानी वाद से जुड़ा था, जिसमें वादी ने विवादित आंगन को पंचायती भूमि बताते हुए निर्माण पर रोक की मांग की थी। हालांकि हाईकोर्ट ने पुराने नक्शों और दस्तावेजों को भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं माना। अदालत ने कहा कि इन दस्तावेजों से यह साबित नहीं होता कि विवादित भूमि सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति थी, इसलिए वादी की द्वितीय अपील खारिज कर दी गई।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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