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सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े तीन दशक पुराने भुगतान विवाद का समाधान हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत परियोजना निर्माण लागत और पुनर्वास पैकेज से जुड़े सभी लंबित भुगतान दावों का वन टाइम सेटलमेंट किया जाएगा। अमित शाह ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में पानी का उपयोग हो, उसका लाभ अंततः भारत के नागरिकों को ही मिलता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नर्मदा और सरदार सरोवर परियोजना मध्य प्रदेश की जीवनरेखा हैं, जिनसे 3,900 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन और 31 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई सुनिश्चित हुई है। उन्होंने बताया कि परियोजना से इंदौर, पीथमपुर, देवास और विक्रम उद्योगपुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को भी पेयजल और औद्योगिक जल मिल रहा है। समझौते से पहले मध्य प्रदेश गुजरात से करीब 5,500 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा कर रहा था, जो बांध की ऊंचाई बढ़ने से डूब क्षेत्र में आई जमीन के पुनर्वास और क्षतिपूर्ति से जुड़ा था।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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