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भोपाल नगर निगम की 10 हजार से अधिक नई संपत्तियां तकनीकी कारणों से अब तक संपत्ति कर के दायरे में नहीं आ सकी हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के तीन महीने बीत जाने के बावजूद इन संपत्तियों का डेटा पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पाया है। नगर निगम ने अप्रैल में सर्वे का डेटा अंतिम रूप देकर नगरीय प्रशासन को भेज दिया था, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण कर निर्धारण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। इसका सीधा असर निगम की आय पर पड़ रहा है और हर महीने औसतन 12.50 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) सर्वे के जरिए करीब दस वर्ष बाद 10,887 नई संपत्तियों की पहचान की गई है। वर्तमान में नगर निगम के रिकॉर्ड में 46,346 संपत्तियां कर के दायरे में हैं, जबकि नई संपत्तियां जुड़ने के बाद यह संख्या बढ़कर 58,233 हो जाएगी। निगम का अनुमान है कि इन नई संपत्तियों से हर साल करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। वर्ष 2025-26 में संपत्ति कर की मांग 15.65 करोड़ रुपये रही थी, जो नई संपत्तियों के शामिल होने के बाद लगभग 17 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
सर्वे के अनुसार सबसे अधिक नई संपत्तियां वार्ड-36 (खानशाहवली) में मिली हैं, जहां करीब 2,000 नई संपत्तियां दर्ज की गई हैं। इसके अलावा वार्ड-5 (किशोर कुमार गांगुली) में 495 और वार्ड-32 (संतोषी माता) में लगभग 1,000 नई संपत्तियों की पहचान हुई है। नगर निगम के बाजार प्रभारी प्रकाश राजपूत ने बताया कि डेटा पोर्टल पर अपडेट करने का काम जारी है और तकनीकी त्रुटियां दूर होते ही सभी नई संपत्तियों को कर के दायरे में शामिल कर लिया जाएगा, जिससे निगम की वार्षिक आय में करीब दो करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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