झाबुआ में मानसून की बेरुखी: 10 साल बाद सूखा बीता जून, फसलों को बचाने के संघर्ष में जुटे किसान
झाबुआ जिले में इस साल मानसून की भारी देरी ने पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे जून का पूरा महीना सूखा बीत गया है। आम तौर पर जून के मध्य तक दस्तक देने वाली मानसूनी बारिश इस बार गायब रही, जिससे पूरे क्षेत्र में भीषण गर्मी और सूखे जैसे हालात बन गए हैं। बारिश न होने के कारण खेतों की मिट्टी की नमी पूरी तरह खत्म हो चुकी है, जिसने स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग की चिंताओं को काफी बढ़ा दिया है।
इस अप्रत्याशित सूखे ने क्षेत्र के किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है, जो अपनी खरीफ की फसलों को बचाने के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं। जिन किसानों ने मानसून की उम्मीद में सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी फसलों की अगेती बुवाई कर दी थी, वे अब अपनी लागत बचाने के लिए निजी कुओं, ट्यूबवेल और ड्रिप सिंचाई प्रणाली का सहारा ले रहे हैं। पानी के घटते जलस्तर के बीच फसलों को जीवित रखना बेहद चुनौतीपूर्ण और खर्चीला साबित हो रहा है, जिससे छोटे किसानों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों ने वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसानों को सलाह दी है कि वे पर्याप्त बारिश और खेतों में सही नमी होने से पहले नई बुवाई बिल्कुल न करें। हालांकि, मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमानों ने थोड़ी राहत की उम्मीद जगाई है, जिसके अनुसार जुलाई के पहले सप्ताह से मानसूनी हवाएं दोबारा सक्रिय होंगी और झाबुआ सहित पूरे मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश होने की संभावना है। किसान अब आगामी दिनों में होने वाली भारी बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि उनकी फसलों को नया जीवन मिल सके।