Since: 23-09-2009
Gujarat High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल मैरिज सर्टिफिकेट जारी हो जाने से हिंदू विवाह वैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि Hindu Marriage Act के तहत विवाह तभी मान्य होगा, जब संबंधित समुदाय की परंपराओं और आवश्यक धार्मिक रस्मों का पालन किया गया हो। जिन समुदायों में सात फेरे की परंपरा है, वहां उनके बिना विवाह पूर्ण नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि मैरिज सर्टिफिकेट केवल पहले से संपन्न विवाह का रिकॉर्ड होता है, वह स्वयं विवाह को वैधता प्रदान नहीं करता।
यह मामला ब्रिटेन में रहने वाले एक व्यक्ति की अपील से जुड़ा था। उसने आरोप लगाया कि अहमदाबाद की एक महिला ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उससे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए और बाद में उन्हीं के आधार पर फर्जी तरीके से मैरिज सर्टिफिकेट बनवा लिया। व्यक्ति का दावा था कि दोनों के बीच कभी विवाह नहीं हुआ और न ही किसी प्रकार की वैवाहिक रस्में संपन्न हुईं। सुनवाई के दौरान महिला ने भी स्वीकार किया कि शादी की कोई धार्मिक रस्म नहीं हुई थी और दोनों कभी पति-पत्नी की तरह साथ नहीं रहे।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का पूर्व आदेश रद्द करते हुए कहा कि जब विवाह की आवश्यक रस्में ही पूरी नहीं हुईं, तो केवल रजिस्ट्रेशन के आधार पर उसे हिंदू विवाह नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि हिंदू परंपरा में विवाह केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक धार्मिक और सामाजिक संस्कार है, इसलिए इसकी वैधता के लिए कानून में निर्धारित आवश्यक रीति-रिवाजों का पालन अनिवार्य है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.
Created By:
Medha Innovation & Development |