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मध्यप्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले जनजातीय छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के गृह जिले खंडवा में कई आदिवासी हॉस्टल और आश्रम पेयजल संकट, अधूरी तैयारियों और साफ-सफाई की समस्याओं से जूझ रहे हैं। एक जुलाई से विद्यार्थियों के प्रवेश होने हैं, लेकिन कई छात्रावासों में सूखे बोरवेल, खाली पानी की टंकियां और अधूरे मरम्मत कार्य चिंता का कारण बने हुए हैं।
खालवा के कन्या छात्रावास में पानी की व्यवस्था टैंकरों के सहारे की जा रही है, जबकि लालचौकी, सर्किट हाउस और खंडवा के कई छात्रावासों में बोरवेल सूखने से पानी की भारी किल्लत है। कुछ स्थानों पर परिसर में गंदगी फैली हुई है और कर्मचारियों की अनुपस्थिति भी सामने आई है। वहीं, नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया चल रही है, लेकिन कई छात्रावासों में मूलभूत सुविधाएं अब तक दुरुस्त नहीं हो सकी हैं।
जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रभारी सहायक आयुक्त बीबी सिंह के अनुसार, कुछ छात्रावासों में बोरवेल सुधार का काम पूरा हो चुका है और शेष स्थानों पर इंजीनियरों के साथ समन्वय कर जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। हालांकि, विद्यार्थियों के आगमन से पहले पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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