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Delhi High Court में टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और टेलीग्राम ने अपने-अपने पक्ष रखे। सरकार ने अदालत में कहा कि टेलीग्राम का इस्तेमाल साइबर अपराध, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, बाल अश्लील सामग्री, आतंकवाद से जुड़े प्रचार और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी गैरकानूनी गतिविधियों में बड़े पैमाने पर हो रहा है। सरकार के अनुसार, प्लेटफॉर्म की गोपनीयता और गुमनामी वाली सुविधाओं ने इसे अपराधियों का पसंदीदा माध्यम बना दिया है। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
केंद्र सरकार ने 21 जून को होने वाली NEET री-एग्जाम को ध्यान में रखते हुए टेलीग्राम पर 22 जून 2026 तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म को 30 जून तक पहले भेजे गए संदेशों को संपादित करने की सुविधा बंद रखने का भी निर्देश दिया गया है। सरकार ने अपने हलफनामे में दावा किया कि टेलीग्राम पर एक अकाउंट से कई बॉट बनाए जा सकते हैं, बड़े चैनलों के सदस्यों को कुछ ही सेकंड में दूसरे चैनलों में स्थानांतरित किया जा सकता है और संदेशों की तारीख व समय बदलने जैसी सुविधाओं का दुरुपयोग किया जा सकता है। सरकार ने 2024 में परीक्षा से जुड़े एक मामले का भी हवाला दिया, जिसमें संदेशों की तारीख बदलने का आरोप था।
टेलीग्राम की ओर से पेश पक्ष में कहा गया कि किसी एक घटना या कुछ अवैध गतिविधियों के आधार पर पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। कंपनी ने अदालत को बताया कि अधिकारियों से सूचना मिलने के एक घंटे के भीतर संबंधित सामग्री हटा दी गई थी और NEET से जुड़ी 900 से अधिक आपत्तिजनक लिंक हटाई जा चुकी हैं। टेलीग्राम ने यह भी कहा कि वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और मैन्युअल निगरानी के माध्यम से नियमों का उल्लंघन करने वाली सामग्री पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब इस मामले में अंतिम फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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