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चंबल में ताजा खनन नहीं मिला, सुप्रीम कोर्ट में MP सरकार का दावा
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राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में कथित अवैध रेत खनन मामले की सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हालिया जांच और ड्रोन निगरानी में किसी भी प्रकार के नए अवैध खनन के प्रमाण नहीं मिले हैं। सरकार के अनुसार मीडिया रिपोर्ट में जिन गड्ढों का उल्लेख किया गया था, वे पुराने खनन की वजह से बने थे और अदालत के पूर्व आदेशों के बाद वहां कोई नई उत्खनन गतिविधि नहीं पाई गई। सरकार ने कहा कि अप्रैल 2026 से अभयारण्य क्षेत्र और आसपास के संवेदनशील इलाकों में लगातार ड्रोन सर्विलांस किया जा रहा है।

सरकार की ओर से पेश हलफनामे में बताया गया कि वन विभाग और प्रशासन ने मौके पर निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया है। कुछ ट्रैक्टरों में रेत परिवहन होने की जानकारी जरूर मिली, लेकिन प्राथमिक जांच में यह सामग्री पहले से डंप की गई रेत होने की संभावना जताई गई है। इसके बावजूद अवैध भंडारण और बिना अनुमति परिवहन के मामलों में कार्रवाई जारी है। सरकार ने अदालत को बताया कि अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, 44 वाहन जब्त किए गए हैं और 8 वाहनों को राजसात करने की कार्रवाई भी पूरी हो चुकी है।

 

सुनवाई के दौरान सरकार ने भरोसा दिलाया कि चंबल क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था और मजबूत की जा रही है तथा अवैध खनन को दोबारा शुरू नहीं होने दिया जाएगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मामले का संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों से जवाब मांगा था। अदालत ने सभी संबंधित राज्यों और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) को ताजा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी।

Priyanshi Chaturvedi 30 May 2026

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