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देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में ईद के मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की अनोखी मिसाल देखने को मिली। सदर बाजार स्थित ईदगाह में नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने समाज को एकता और सद्भाव का संदेश देते हुए गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि गाय को दूसरे समुदाय के लोग बेहद सम्मान की नजर से देखते हैं, इसलिए उसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर उसके संरक्षण को और मजबूत किया जाना चाहिए। काजी की इस अपील का वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया, जिसके बाद शांतिपूर्वक ईद की नमाज अदा की गई।
शहर काजी ने अपने संबोधन में पर्यावरण और जल संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने लोगों से अपील की कि बारिश के पानी को जमीन में उतारने की दिशा में सभी को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सरकार या प्रशासन के भरोसे रहने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इसके साथ ही उन्होंने नशे के बढ़ते कारोबार पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज के कुछ लोग खुद युवाओं को इस दलदल में धकेल रहे हैं, जिससे बचना बेहद जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता और सामाजिक भागीदारी ही इसका सबसे बड़ा समाधान है।
इंदौर की ईद एक और खास वजह से पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां पिछले करीब 50 वर्षों से एक हिंदू परिवार शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की परंपरा निभा रहा है। इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने फूल-मालाओं से स्वागत कर शहर काजी को विशेष रूप से सजाई गई बग्घी में ईदगाह पहुंचाया। यह परंपरा इंदौर की साझा संस्कृति और भाईचारे की मिसाल मानी जाती है। वहीं, त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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