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Supreme Court of India ने आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और लोगों की सुरक्षा को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि रेबीज से संक्रमित या बेहद खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत इंजेक्शन देकर मारा जा सकता है। अदालत ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और गरिमा के साथ जीने के अधिकार में कुत्तों के खतरे से मुक्त वातावरण भी शामिल है। कोर्ट ने साफ कहा कि जो अधिकारी अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।
जस्टिसVikram Nath, Sandeep Mehta औरN. V. Anjaria की बेंच ने नवंबर 2025 में जारी अपने आदेशों को वापस लेने की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने पहले स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें शेल्टर होम में रखने के निर्देश दिए थे। साथ ही सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाई गई थी। अदालत ने राजस्थान, तमिलनाडु और गुजरात में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सार्वजनिक सुरक्षा का गंभीर मामला है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और स्थानीय निकायों को 9 अहम निर्देश जारी किए हैं। इनमें हर जिले में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर स्थापित करना, एंटी-रेबीज दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना, हाईवे और सार्वजनिक स्थानों से आवारा पशुओं को हटाना और जरूरत पड़ने पर यूथेनेशिया लागू करना शामिल है। अदालत ने यह भी कहा कि आदेश लागू करने वाले अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा दी जाएगी ताकि वे बिना डर के कार्रवाई कर सकें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक लापरवाही और निष्क्रियता अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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