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छत्तीसगढ़ केBastar के घने जंगलों में सक्रिय नक्सली नेटवर्क की फंडिंग को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ा इनपुट मिला है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नक्सली हर साल करीब 80 से 100 करोड़ रुपए तक की लेवी वसूलते रहे हैं, जबकि पिछले कई वर्षों में सुरक्षा बलों को केवल 15 से 25 करोड़ रुपए ही बरामद हुए हैं। अनुमान है कि अब तक कुल वसूली लगभग 1000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि बाकी रकम कहां छिपाई गई है।
खुफिया जानकारी के मुताबिक, यह रकम जंगलों में जमीन के नीचे प्लास्टिक ड्रमों में दफन की गई हो सकती है। खासतौर परIndravati Tiger Reserve औरAbujhmad जैसे दुर्गम इलाकों पर सुरक्षा बलों का फोकस है। सरेंडर नक्सलियों की मदद से इन ठिकानों की पहचान की जा रही है, क्योंकि इन गुप्त स्थानों की जानकारी केवल चुनिंदा कमांडरों के पास होती थी।
सुरक्षा एजेंसियां अब आधुनिक तकनीकों का सहारा लेकर इस छिपे खजाने की तलाश में जुटी हैं। ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) से जमीन के भीतर छिपे ड्रमों का पता लगाया जा रहा है, वहीं फाइनेंशियल ट्रैकिंग के जरिए संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखी जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि नोटबंदी के बाद नक्सलियों ने बड़ी मात्रा में नकदी को सोने में बदल दिया था, हाल ही मेंBijapur औरJagdalpur से करीब 8 किलो सोना बरामद हुआ है, जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी गई है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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