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Bhopal की जीवनरेखा माने जाने वाले बड़ा तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जों का मामला सामने आया है। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार कुल 347 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं, जो तालाब के शहरी हिस्से में 50 मीटर के दायरे तक फैले हुए हैं। हालांकि अब तक सिर्फ करीब 50 कब्जों को ही हटाया जा सका है, जबकि कई प्रभावशाली और कथित रसूखदारों के निर्माण पर कार्रवाई नहीं हुई है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की फटकार के बाद मार्च में सर्वे कर यह अतिक्रमण सूचीबद्ध किए गए थे। इसके बाद प्रशासन ने 15 दिन की कार्ययोजना तैयार की थी और अलग-अलग क्षेत्रों में 6 से 21 अप्रैल तक कार्रवाई तय की गई थी। शुरुआती दिनों में कुछ झुग्गियों, दुकानों और छोटे निर्माणों को हटाया भी गया, लेकिन बाद में अभियान धीमा पड़ गया और कई बड़े निर्माण जस के तस रह गए।
सूत्रों के मुताबिक 12 अप्रैल के बाद, जब प्रशासनिक बदलाव हुए, तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी रुक गई। वहीं नए कलेक्टर ने बड़ा तालाब को शहर की शान बताते हुए इसके संरक्षण और सुधार का भरोसा दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि तय शेड्यूल के बावजूद बाकी बचे कब्जों पर कार्रवाई कब और कितनी सख्ती से होगी।
योजना के अनुसार 15 दिन के भीतर पूरी कार्रवाई होनी थी, लेकिन कई महत्वपूर्ण चरण पूरे नहीं हो सके। बैरागढ़, टीटी नगर और हुजूर तहसील क्षेत्रों में प्रस्तावित कई तोड़फोड़ अभियान स्थगित कर दिए गए। इससे अभियान की गति पर सवाल उठ रहे हैं और यह भी आरोप लग रहे हैं कि बड़े और प्रभावशाली कब्जों को बचाया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति में बड़ा तालाब के आसपास अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया अधूरी है और प्रशासनिक ढिलाई के कारण यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि बची हुई कार्रवाई कब पूरी की जाएगी और क्या वाकई तालाब को उसके मूल स्वरूप में लाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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