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बुंदेलखंड का रहस्यमयी ‘अबार माता’ मंदिर, जहाँ डाकू भी झुकते थे सिर
The mysterious Abar Mata temple of Bundelkhand, where even bandits bowed their heads.

 

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में स्थित ‘अबार माता’ मंदिर चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर विशेष आस्था का केंद्र बनता है। यह मंदिर सागर, छतरपुर और टीकमगढ़ जिलों की सीमा पर स्थित है और अपनी पौराणिक मान्यताओं और रहस्यमयी विशेषताओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।

 

मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ की विशाल ग्रेनाइट चट्टान है, जिसमें माता का निवास माना जाता है। समय के साथ यह चट्टान बढ़कर लगभग 70 फीट ऊँची हो गई है। स्थानीय मान्यता है कि हर महाशिवरात्रि पर इसकी लंबाई ‘एक तिल’ के बराबर बढ़ती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि चट्टान को छूने से निसंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।

 

जनश्रुति के अनुसार, महोबा के वीर योद्धा आल्हा-ऊदल जब माढ़ोगढ़ जा रहे थे, तो जंगल में देर होने पर उन्होंने माता की आराधना की। माता ने उन्हें दर्शन दिए और तब से यह स्थान ‘अबार माता’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर में आज भी मुख्य पूजन ग्रेनाइट चट्टान का ही होता है, और प्राकृतिक पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है।

 

शारदीय नवरात्रि में पंचमी और अष्टमी को माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है और मंदिर में मेले जैसा माहौल बनता है। वैशाख माह में आयोजित 10 दिवसीय भव्य मेला बुंदेलखंड में प्रसिद्ध है। मंदिर सागर से 85 किलोमीटर और शाहगढ़ से 15 किलोमीटर दूर है, और यहाँ बस तथा टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।

Priyanshi Chaturvedi 21 March 2026

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