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राजधानी रायपुर समेत प्रदेश में करीब 50 वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। इनमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस स्तर के अफसर शामिल हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कई मामलों में अभियोजन स्वीकृति मांगी है, लेकिन नौ अधिकारियों के खिलाफ अब तक अनुमति नहीं मिल सकी है। इससे जांच एजेंसियों की कार्रवाई प्रभावित हो रही है और कई फाइलें महीनों से लंबित पड़ी हैं।
कोयला और शराब घोटालों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की निविदा प्रक्रिया और राजस्व विभाग की पटवारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। कुछ मामलों में जनवरी 2026 में जांच स्वीकृति मिलने के बाद दायरा और बढ़ा है। वहीं, महादेव एप सट्टा प्रकरण में पुलिस विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
वन विभाग में पौधा खरीदी और कैंपा मद के उपयोग को लेकर भी जांच लंबित है। लगातार स्वीकृतियों में देरी से प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है। विपक्ष सरकार पर कार्रवाई टालने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सभी मामलों में विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जाएगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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