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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन-इंदौर ग्रीन फील्ड फोरलेन परियोजना को लेकर चल रहे लंबे विवाद को समाप्त कर दिया है। किसानों से मुलाकात के बाद उन्होंने एलिवेटेड सड़क योजना रद्द कर फोरलेन को जमीन स्तर पर बनाने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की घोषणा की। इस फैसले के साथ ही करीब डेढ़ वर्ष से जारी विरोध खत्म हो गया और किसानों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया।
उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजनाओं से कई गांव प्रभावित हो रहे थे। प्रस्तावित योजना के तहत सड़क को 15 से 20 फीट ऊंचाई पर बनाया जाना था, जिसका किसान विरोध कर रहे थे। उनकी मांग थी कि सड़क की ऊंचाई कम की जाए और मुआवजा बढ़ाया जाए। भोपाल में मुख्यमंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक के बाद सरकार ने किसानों के सुझावों को स्वीकार करते हुए परियोजना में बदलाव का निर्णय लिया।
मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम की लगभग 2935 करोड़ रुपये की इस परियोजना से दो जिलों के 28 गांवों को नया स्वरूप और बेहतर जनसुविधाएं मिलेंगी। वेस्टर्न रिंग रोड और उज्जैन-बदनावर मार्ग क्रॉसिंग पर बड़े जंक्शन बनाए जाएंगे, साथ ही टोल प्लाजा पर आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना आगामी सिंहस्थ और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है तथा इससे परिवहन सुरक्षित और सुगम होगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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