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मध्यप्रदेश में नाबालिग बच्चियों के गुम होने की घटनाओं ने बढ़ाई पुलिस की चिंता
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मध्यप्रदेश में नाबालिग बच्चियों के घर से गायब होने की घटनाओं ने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) की महिला शाखा की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेशभर में बच्चियों का बचपन खतरे में है और वे प्रेम प्रसंग या सामाजिक दबाव के कारण घर से दूर जा रही हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई मामलों में बच्चियां फोन और इंटरनेट की वजह से अप्राकृतिक प्रभावित हो रही हैं और उम्र से पहले मानसिक और सामाजिक रूप से परिपक्व हो रही हैं।

 

2025 के आंकड़े दर्शाते हैं कि केवल एक साल में 13,146 नाबालिग बच्चियां गुम हुईं। इनमें से 18.4% (2,418) प्रेमी के साथ घर से चली गईं। वहीं 5,692 (43.3%) बच्चियां घर से नाराज होकर चली गईं, जिनमें अधिकांश मामलों में अप्रत्यक्ष रूप से प्रेम संबंध सामने आए। इसके अलावा 1,959 बच्चियां मर्जी से रिश्तेदारों के पास गईं, 368 आर्थिक तंगी के कारण घर छोड़ गईं और 131 बच्चियां रास्ता भटक गईं। साल 2025 में कुल 14,520 गुम बच्चों को फिर भी दस्तयाब किया गया।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन और मुफ्त इंटरनेट इसका प्रमुख कारण हैं। बच्चे रील और ऑनलाइन कंटेंट के प्रभाव में अपनी उम्र से पहले ही मानसिक और सामाजिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने अभिभावकों और समाज से आग्रह किया है कि वे बच्चों पर नजर रखें और उनका डिजिटल उपयोग नियंत्रित करें, ताकि उनके बचपन और सुरक्षा को खतरा न पहुंचे।

Priyanshi Chaturvedi 21 January 2026

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