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प्रदेश में बिना मान्यता के संचालित नर्सरी स्कूलों को लेकर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को लगाई फटकार
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बिलासपुर/रायपुर ।छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रदेश में बिना मान्यता के संचालित 330 से अधिक नर्सरी स्कूलों को लेकर राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई । मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि जिन स्कूलों ने 12 वर्षों तक बिना मान्यता के संचालन किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। प्रभावित बच्चों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा दिलवाकर अन्य स्कूलों में शिफ्ट कराया जाए।मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को तय की गई है।

उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डबल बेंच ने कांग्रेस नेता विकास तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि 2013 से लागू नर्सरी स्कूलों की मान्यता संबंधी नियमों को नजरअंदाज कर नए नियम बनाकर पिछली तिथि से लागू नहीं किया जा सकता।  शिक्षा सचिव के अवकाश पर होने की जानकारी दिए जाने पर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि सचिव साहब तो हमारे डर से 15 दिन की छुट्टी को 30 दिन बढ़ा देंगे। इतने गंभीर मामले में सचिव की गैरहाजिरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत  ने 13 अगस्त तक शिक्षा सचिव से या उनकी अनुपस्थिति में संयुक्त सचिव से नया शपथ पत्र दाखिल करने कहा है।

मामले में शिक्षा विभाग ने अपने शपथ पत्र में यह दावा किया था कि नर्सरी स्कूलों को मान्यता देने का कोई प्रावधान नहीं है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संदीप दुबे ने 2013 के सर्कुलर का हवाला देते हुए इस दावे को झूठा बताया। अदालत ने मामले में सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की और कहा कि आपके जवाब से तो ऐसा लग रहा है कि पानठेला वाले भी स्कूल खोल सकते हैं। जब बड़े स्कूल संचालकों पर कार्रवाई का समय आया, आपने नियम ही बदल डाले। नियम बदल कर आप मर्सिडीज वालों को बचा रहे हैं। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करने देंगे।

अदालत  ने राज्य सरकार से पूछा कि जब 2013 से मान्यता की अनिवार्यता थी, तब 12 वर्षों तक बिना अनुमति स्कूल कैसे चलते रहे। चीफ जस्टिस ने कहा कि, आपने 25 जुलाई को कमेटी बनाई और दो दिन में रिपोर्ट भी आ गई। यह पूरी प्रक्रिया केवल बड़े स्कूल संचालकों को बचाने के लिए की गई है। कोर्ट ने आगे कहा कि बच्चों और पालकों से फर्जीवाड़ा करने वाले स्कूलों पर क्रिमिनल केस दर्ज करें और सभी बच्चों को मुआवजा दिलाएं।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि आप लोगों ने बच्चों और पालकों के साथ फ्राड किया है। गली-मोहल्ले में स्कूल खोलकर लाखों रुपये कमाए और खुद मर्सिडीज में घूम रहे हैं। बच्चों को मुआवजा दिलवाइए, तो इनके द्वारा कमाया गया सारा पैसा निकल जाएगा।

 

MadhyaBharat 6 August 2025

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