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नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत ने की भारतमाला परियोजना में भ्रष्टाचार की जांच सीबीआई से कराने की मांग
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रायपुर ।छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना में भ्रष्टाचार की जांच को सीबीआई से कराए जाने की मांग को लेकर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा है।नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के अन्तर्गत जितनी भी सड़कों का निर्माण करने के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया है, उन सभी में इसी प्रकार से आपराधिक षड़यंत्रपूर्वक भ्रष्टाचार किया गया है अतः सभी की जांच केन्द्रीय एजेन्सी से कराए जाने की आवश्यकता है।डॉ महंत ने कहा है कि यह प्रकरण सी.बी.आई. को सौपने और भारतमाला परियोजना के लिए भूमि अर्जन, मुआवजा निर्धारण के अन्य सभी प्रकरणों की भी जांच कराए जाने की मांग की है।

 

छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने शुक्रवार को प्रेषित पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के अन्तर्गत रायपुर विशाखापटनम प्रस्तावित इकनोमिक कॉरिडोर के सड़क निर्माण किया रहा है। अनुविभाग अभनपुर जिला- रायपुर अन्तर्गत निजी भूमि के अधिग्रहण से मुआवजा राशि के निर्धारण तक की प्रक्रिया में विधि विरूद्ध कार्रवाई करते हुए, लोक सेवकों तथा भूमि स्वामियों के द्वारा आपराधिक षड़यंत्रपूर्वक ऐसे भ्रष्ट आचारण किये गये हैं, जिसके कारण भारत सरकार को कम से कम रू. 43,18,27,627.00 की आर्थिक क्षति हुई है।जांच प्रतिवेदन के अनुसार वास्तविक मुआवजा राशि रू. 7,65,30,692.00 होता है, परंतु मुआवजा राशि का निर्धारण और भुगतान रू. 49,39,40,464.00 किया गया है।इस प्रकार रू. 43,18,27,627.00 का अधिक निर्धारण कर दिया गया।

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि जांच प्रतिवेदन के निष्कर्षों के अनुसार भूमि के अर्जन की वैधानिक अधिसूचना के प्रकाशन के पश्चात् पूर्व की तिथियों में क्रय/विक्रय पंयन/बटांकन/नामांतरण की विधि विरूद्ध कार्रवाई की गई। जिसके कारण भूमि के खातों का विभाजन हुआ फलस्वरूप बहुत अधिक दर से मुआवजा निर्धारण हुआ।

 

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस पर चर्चा के दौरान दिनांक 12 मार्च 2025 को राजस्व मंत्री और मुख्य मंत्री से यह अनुरोध किया गया कि- ”चूंकि यह प्रकरण भ्रष्टाचार का है, यह भारत सरकार की परियोजना है और इसमें कतिपय वरिष्ठ अधिकारियों की भी संलिप्तता संभावित है इसलिए इसकी जांच सी.बी.आई. को दे दी जाए अथवा विधायकों की कमेटी गठित कर जांच कराई जाए।परंतु अनुरोध को स्वीकार नहीं करते हुए कमिश्नर से जांच कराने की घोषणा राजस्व मंत्री के द्वारा की गई। 12 मार्च 2025 को ही अपरान्ह में मंत्रि परिषद् की बैठक के अन्य विषय में निर्णय लिया गया कि इस प्रकरण की जांच ई.ओ.डब्ल्यू. करेगा। ई.ओ.डब्ल्यू. (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरों) राज्य की एक एजेंसी है इसलिए भारतमाला परियोजना के आर्थिक अपराध की जांच करने के लिए राज्य की कोई भी एजेन्सी सक्षम नहीं है। यदि राज्य की एजेन्सी कार्रवाई करती भी है तो उसे सक्षम न्यायालय में सक्षमता के प्रश्न पर चुनौती दी जा सकती है, जिससे राज्य की एजेन्सी द्वारा की गई कार्यवाही अवैधानिक ठहराई जा सकती है और भ्रष्टाचारी दण्ड से बच सकते हैं।

 

उन्होंने पत्र में जानकारी दी है कि जांच प्रतिवेदन दिनांक 11.09.2023 का है जो राज्य सरकार को बहुत पहले ही प्राप्त हो चुका है,किंतु इस पर तब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। जब तक कि मेरे द्वारा विधानसभा प्रश्न के माध्यम से इसे उठाया नहीं गया था। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार की मंशा कार्रवाई करने की नहीं है। भ्रष्टाचार के इस प्रकरण में अधिक भुगतान की गई राशि रू. 43.18 करोड़ की ब्याज सहित वसूली भी की जानी है, जिसके लिए अब तक कोई भी कार्यवाही प्रारंभ नहीं की गई है। इस आपराधिक षड़यंत्र में 100 से अधिक लोक सेवक तथा भूमि स्वामी संलिप्त हैं। यह जांच प्रतिवेदन भारतमाला परियोजना के लिए भूमि अर्जन में केवल एक अनुविभाग अभनपुर में हुए भ्रष्टाचार से संबंधित है। इस जांच में अनेक बिन्दुओं को छोड़ भी दिया गया है आपराधिक षड़यंत्र का भी उल्लेख नहीं किया गया है। अतः इस जांच प्रतिवेदन के आधार पर आरोपितों के विरूद्ध की गई कोई भी कार्रवाई न्यायालय के समक्ष स्थिर नहीं रह सकेगी।

MadhyaBharat 5 April 2025

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